बहुचर्चित व्यापमं घोटाला: आरक्षक भर्ती परीक्षा में 7 आरोपियों को 7 साल की सजा, 10-10 हजार रुपये का जुर्माना
✍️नौशाद कुरैशी
भोपाल। व्यापमं द्वारा वर्ष 2013 में आयोजित पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में हुए घोटाले के मामले में विशेष सीबीआई अदालत ने 7 आरोपियों को दोषी करार देते हुए 7 साल के सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला सीबीआई के विशेष न्यायाधीश नीतिराज सिंह सिसोदिया ने सुनाया। दोषियों में विवेक त्यागी, चरण सिंह सिकरवार, सुनील रावत, संदीप नायक, बृजेंद्र सिंह रावत, श्रीनिवास सिंघल और हरिओम रावत शामिल हैं।
मामले का विवरण
सीबीआई के लोक अभियोजक सुशील कुमार पांडेय ने जानकारी दी कि 2013 में व्यापमं ने पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा आयोजित की थी।
दलालों की मिलीभगत: आरोपियों विवेक त्यागी, चरण सिंह सिकरवार और सुनील रावत ने दलालों की सहायता से परीक्षा में अपने स्थान पर साल्वर (दूसरे व्यक्ति) को बैठाकर परीक्षा पास की।
शिकायत और जांच: एसटीएफ को मामले की शिकायत मिलने पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 467, 468, 471, 120-बी और मध्यप्रदेश मान्यता पात्रता परीक्षा अधिनियम 1937 की धारा 3(घ)(1) सहपठित धारा 4 के तहत मामला दर्ज किया गया।
सीबीआई की कार्रवाई
घोटाले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने व्यापमं मामले की जांच सीबीआई को सौंपी। सीबीआई ने मामले की पुनः जांच की और आरोपियों के खिलाफ पूरक चालान पेश किया।
आरोपियों को सजा
विशेष अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद सभी 7 आरोपियों को दोषी मानते हुए:
1. 7 साल का सश्रम कारावास।
2. 10-10 हजार रुपये का जुर्माना।
अदालत ने इस सजा को व्यापमं घोटाले जैसे संगीन मामलों में कानून व्यवस्था बनाए रखने और समाज में अनुशासन स्थापित करने का महत्वपूर्ण कदम बताया। यह व्यापमं घोटाले के लंबी जांच और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद आया एक बड़ा फैसला है, जो घोटालेबाजों के खिलाफ कड़ा संदेश देता है।
Comments
Post a Comment