पंचकोषी पदयात्रा का हनुमान मंदिर बाकानेर में स्वागत, दूसरा पड़ाव सुलगांव में
बाकानेर (सैयद रिजवान अली) । शैल प्रवासी संप्रदाय के तत्वावधान में सनातन धर्म और पुरातन संस्कृति की रक्षा के उद्देश्य से निकाली जा रही पंचकोषी पदयात्रा अपने 29वें वर्ष में है। यह यात्रा ब्रह्मलीन श्री गजानंद जी महाराज बालीपुर की गुरुदक्षिणा स्वरूप एवं ब्रह्मलीन माता रामदुलारी देवी कपिलाश्रम लोहारा की स्मृति में तथा गुरुदेव रविंद्र चौरे की प्रेरणा से आयोजित की गई है।
यात्रा का शुभारंभ और पहला पड़ाव
पदयात्रा का शुभारंभ 27 नवंबर को मां नर्मदा और ओंकार ध्वज पूजन, आरती, नर्मदाष्टक और शिवाष्टक के साथ हुआ। मां नर्मदा की जय घोष के बीच यात्रा प्रारंभ हुई, जिसका पहला पड़ाव बाकानेर के श्री खेड़ापति सरकार हनुमानजी मंदिर में हुआ।
यहां पर महंत सीताराम बाबा, वरिष्ठ समाजसेवी सुनील जायसवाल, जितेंद्र कानूनगो, वीरेंद्र कानूनगो, गोविंद राधे-राधे, कृष्णकांत जोशी, जगदीश सोनी, रामअवतार जायसवाल, राधेश्याम चौहान, और नाथूलाल सिसोदिया ने यात्रियों का स्वागत किया। साथ ही सभी यात्रियों के लिए भोजन प्रसादी का आयोजन किया गया। चौकी प्रभारी अश्विन चौहान और गोरेलाल शुक्ला भी यात्रा के दौरान मौजूद रहे।
आगे का यात्रा क्रम
दूसरा पड़ाव: पदयात्रा टवलाई, महापुरा, और गोगावां होते हुए नर्मदा तट सुलगांव पहुंचेगी।
तीसरा पड़ाव: सुलगांव से नाव द्वारा नर्मदा पार कर ब्राह्मणगांव, दवाना, लखनगांव फाटे से होते हुए सेमलदा डेब में रात्रि विश्राम होगा।
चौथा पड़ाव: रामदुलारी देवी कपिलाश्रम, लोहारा।
अंतिम पड़ाव और समापन: पांचवे दिन बड़ा बड़दा पहुंचकर मां नर्मदा, ओंकार जी का ध्वज पूजन, आरती, नर्मदाष्टक और शिवाष्टक के साथ पदयात्रा का समापन होगा।
समाज की भागीदारी और उद्देश्य
स्थानीय समिति ग्राम बड़ा बड़दा द्वारा संचालित इस यात्रा का उद्देश्य सनातन धर्म और नर्मदा भक्तों के प्रति समर्पण को बढ़ावा देना है। यात्रा के दौरान श्रद्धालु प्राचीन संस्कृति और आध्यात्मिकता को आत्मसात कर रहे हैं।
यात्रा संचालक एवं ध्वजवाहक राजेंद्र शर्मा खलघाट ने बताया कि इस पदयात्रा को हर साल भक्तों का अपार समर्थन मिलता है, जिससे सनातन परंपरा को निरंतर संजीवनी मिल रही है।
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