नर्मदापुरम पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी को लेकर जारी की एडवाइजरी
✍️नर्मदापुरम से राजीव रोहर की रिपोर्ट
साइबर अपराधियों द्वारा डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए नर्मदापुरम पुलिस विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। पुलिस अधीक्षक डॉ. गुरकरन सिंह ने नागरिकों से सतर्क रहने और किसी भी अजनबी कॉल या व्हाट्सएप कॉल पर विश्वास न करने की अपील की है, विशेष रूप से उन कॉल्स पर जो पाकिस्तान या अन्य विदेशी नंबरों (+92 आदि) से आ रही हों।
साइबर अपराधियों की कार्यप्रणाली
साइबर अपराधी व्हाट्सएप या फोन कॉल के जरिए लोगों से संपर्क करते हैं और खुद को किसी सरकारी जांच एजेंसी जैसे एनसीबी, सीबीआई, ईडी, या एनआईए का अधिकारी बताते हैं।
वे पीड़ित पर नशीली दवाओं से जुड़े मामले में संलिप्त होने का झूठा आरोप लगाते हैं।
अपराधी डराने-धमकाने की रणनीति अपनाकर पैसों की मांग करते हैं।
कभी-कभी वीडियो कॉल पर फर्जी नोटिस दिखाकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी दी जाती है और पीड़ित को घर में बंद रहने के लिए कहा जाता है।
एहतियात बरतने की सलाह
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे:
1. अंजान नंबरों की कॉल्स का जवाब न दें।
2. विदेशी नंबरों (+92 आदि) से सतर्क रहें।
3. डिजिटल अरेस्ट की धमकी को नजरअंदाज करें।
भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट का कोई प्रावधान नहीं है।
4. अपनी व्यक्तिगत जानकारी जैसे बैंक खाता विवरण, आधार कार्ड, आदि किसी से साझा न करें।
ठगी का शिकार होने पर क्या करें?
यदि कोई साइबर ठगी का शिकार होता है, तो वह तुरंत निम्नलिखित पर शिकायत दर्ज करा सकता है:
निकटतम पुलिस थाना।
राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल: www.cybercrime.gov.in।
साइबर क्राइम हेल्पलाइन (टोल फ्री): 1930।
नर्मदापुरम साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन: 7049126590।
पुलिस अधीक्षक डॉ. गुरकरन सिंह ने नागरिकों से साइबर अपराधों के प्रति जागरूक रहने और किसी भी प्रकार की ठगी से बचने के लिए सतर्कता बरतने की अपील की है।
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