नो डिटेंशन पॉलिसी खत्म: अब 5वीं और 8वीं की परीक्षा में फेल होंगे विद्यार्थी..!


  • परीक्षा में असफलता पर विद्यार्थियों को मिलेगा दोबारा मौका 

✍️नौशाद कुरैशी 

केंद्र सरकार ने बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने संबंधी कानून के तहत ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ को खत्म कर दिया है। अब राज्यों को 5वीं और 8वीं कक्षा के असफल विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रमोट करने की बाध्यता नहीं होगी। नए नियमों के अनुसार, इन कक्षाओं में वार्षिक परीक्षा में असफल होने वाले छात्रों को दो महीने के भीतर दोबारा परीक्षा देने का मौका मिलेगा। यदि वे पुनर्परीक्षा में भी असफल रहते हैं, तो उन्हें उसी कक्षा में रोक दिया जाएगा।

शिक्षा मंत्रालय में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार ने इस बदलाव के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सरकार का उद्देश्य यह है कि विद्यार्थियों का सीखने का स्तर बेहतर हो और कमजोर छात्रों पर विशेष ध्यान दिया जा सके। हालांकि, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि 8वीं कक्षा तक किसी भी छात्र को स्कूल से निष्कासित न किया जाए।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप कदम

संजय कुमार ने कहा कि यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों के अनुरूप है, जिसमें बच्चों के लर्निंग आउटकम्स में सुधार लाने और कमजोर छात्रों के लिए विशेष सहयोग प्रदान करने पर बल दिया गया है। उन्होंने कहा कि संशोधित नियम यह सुनिश्चित करेंगे कि शिक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी और समावेशी हो।

अधिसूचना का विवरण

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत संशोधित नियमों को लागू करने के लिए अधिसूचना जारी की है। इसे निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (संशोधन) नियम, 2024 नाम दिया गया है। ये नियम सरकारी राजपत्र में प्रकाशन के बाद से प्रभावी हो गए हैं।

परीक्षा और पुनर्परीक्षा का प्रावधान

संशोधित नियमों के अनुसार:

राज्य सरकारें 5वीं और 8वीं कक्षा के छात्रों के लिए हर शैक्षणिक वर्ष के अंत में नियमित परीक्षाएं आयोजित कर सकती हैं।

असफल छात्रों को दो महीने के भीतर अतिरिक्त पढ़ाई और पुनर्परीक्षा का अवसर दिया जाएगा।

पुनर्परीक्षा में भी असफल छात्रों को उसी कक्षा में रोक दिया जाएगा।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम की सुरक्षा

आरटीई अधिनियम के तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी बच्चे को 8वीं कक्षा तक स्कूल से बाहर न किया जाए। स्कूलों के प्रधानाचार्यों को अनुत्तीर्ण छात्रों की सूची तैयार करनी होगी, सीखने में आने वाली कठिनाइयों की पहचान करनी होगी और इन छात्रों के लिए विशेष सहायता उपलब्ध करानी होगी।

समग्र विकास की दिशा में कदम

सरकार का मानना है कि नो डिटेंशन पॉलिसी की समाप्ति से शिक्षा प्रणाली में सुधार होगा। इससे बच्चों के सीखने की प्रक्रिया में अंतराल को दूर करने और पढ़ाई में रुचि बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही, शिक्षकों को कमजोर छात्रों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा, जिससे समग्र रूप से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।




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