लोकायुक्त: गोपनीयता की नाव में छेद “छोटी मछलियों” पर कार्रवाई
- बड़े खेल के बीच ट्रांसफर एक्सप्रेस दौड़ी
🧐विशेष रिपोर्ट ✍️नौशाद कुरैशी
भोपाल। मध्य प्रदेश में लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपना तेज धार चाकू निकाला, लेकिन जैसे ही चाकू चला, सारी गोपनीयता चिल्लाकर लीक हो गई। नतीजा? पूरी टीम पर फेरबदल की गाज गिर गई। आरटीओ के पूर्व कांस्टेबल सौरभ शर्मा के ठिकानों पर हुई कार्रवाई के बाद, लोकायुक्त पुलिस में मानो शतरंज के प्यादों की नई बिछावट शुरू हो गई।
तीन दिन में ट्रांसफर का महासंग्राम
लोकायुक्त ने 34 पुलिसकर्मियों को नए ठिकानों पर रवाना कर दिया। ऐसा लग रहा था कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई नहीं, बल्कि तबादला उत्सव मनाया जा रहा हो। 4 डीएसपी, 6 निरीक्षक और 24 आरक्षकों को बाहर का रास्ता दिखाया गया, और उनकी जगह 6 निरीक्षक व 28 नए पुलिसकर्मी ध्वज थामने भेजे गए।
छोटी मछलियों पर बड़ी गाज
लोकायुक्त संगठन से हटाए गए डीएसपी और निरीक्षकों की सूची देखकर ऐसा लगा जैसे बड़े घोटालों का पर्दाफाश करने का जिम्मा सिर्फ उन्हीं पर था। लेकिन लीक हुई जानकारी ने उनकी कुर्सियां हिला दीं। इंदौर, रीवा, उज्जैन और भोपाल के अफसरों को नई जगह मौन साधना करने भेज दिया गया।
ईओडब्ल्यू की नई फौज
जिन्हें लोकायुक्त से हटा दिया गया, उनमें से कुछ को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) में आर्थिक गणित सुधारने भेजा गया। ये निरीक्षक अब बड़ी मछलियों पर शिकंजा कसने की तैयारी में हैं, हालांकि लीक का डर अभी भी पीछा कर रहा है।
गोपनीयता: खुला खेल फर्रुखाबादी
आरटीओ के पूर्व कांस्टेबल पर कार्रवाई से पहले जिस गोपनीयता का ढोल पीटा गया था, वह आखिर किस गली में बजा, यह अब तक रहस्य है। कहा जा रहा है कि यह फेरबदल उस लीक का परिणाम है, जिसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ छापा पहले से ही बाजार में चर्चा बन चुका था।
कौन है जिम्मेदार?
भ्रष्टाचार के खिलाफ छेड़ी गई इसमहाभारत में सवाल उठ रहे हैं कि आखिरकार जानकारी लीक कैसे हुई। क्या यह अंदरूनी राजनीति थी, या भ्रष्टाचार की जड़ों को काटने के बजाय खुद उन पर पानी डालने की कोशिश?
लोकायुक्त के इस छोटी मछलियां हटाओ, गोपनीयता बचाओ अभियान ने एक बात तो साफ कर दी—बड़ी मछलियां अब भी सुरक्षित तैर रही हैं। और जब तक गोपनीयता की नाव में छेद बंद नहीं होता, तबादलों का यह महासंग्राम चलता रहेगा।
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