मां नर्मदा महाविद्यालय धामनोद में 20वां वार्षिक उत्सव "जलसा 2024-25" भव्य आयोजन के साथ संपन्न
धामनोद (सैयद रिजवान अली की रिपोर्ट)। मां नर्मदा महाविद्यालय धामनोद में 20वें वार्षिक उत्सव "जलसा 2024-25" का आयोजन उत्साह और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय निदेशक डॉ. मनोज नाहर, निर्देशिका श्रीमती रीना नाहर और प्राचार्या डॉ. प्रिया त्रिवेदी ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया।
खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों में विजेताओं का सम्मान
इस उत्सव में विद्यार्थियों की प्रतिभा को सराहते हुए खेलकूद और सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार वितरण किया गया। खेलकूद में 100 एवं 200 मीटर रेस, क्रिकेट, कबड्डी, शतरंज, भाला फेंक, गोला फेंक, खो-खो और बैडमिंटन जैसे खेल शामिल थे। इसके अतिरिक्त, केश सज्जा और ब्राइडल मेकअप जैसे रचनात्मक प्रतिस्पर्धाओं में भी छात्रों ने भाग लिया। जिला और संभाग स्तर पर युवा उत्सव में भाग लेने वाले और एनएसएस शिविर में उत्कृष्ट योगदान देने वाले छात्रों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम: अनेकता में एकता का संदेश
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। गणेश वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसके बाद मराठी, गुजराती, राजस्थानी, दक्षिण भारतीय, आदिवासी, बॉलीवुड और टॉलीवुड नृत्यों के माध्यम से "अनेकता में एकता" का संदेश दिया गया। इन प्रस्तुतियों ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्राचार्या का वार्षिक प्रतिवेदन
प्राचार्या डॉ. प्रिया त्रिवेदी ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए महाविद्यालय की गतिविधियों और उपलब्धियों से सभी को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि मां नर्मदा महाविद्यालय ज्ञान, अनुसंधान और भारतीय संस्कृति का केंद्र है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को बौद्धिक, नैतिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है। उन्होंने बताया कि आगामी सत्र 2024-25 में महाविद्यालय अनुसंधान केंद्र की स्थापना की दिशा में प्रयासरत है।
निदेशक और निर्देशिका के प्रेरक उद्बोधन
महाविद्यालय निदेशक डॉ. नाहर ने छात्रों को पुरस्कार और मेडल देकर सम्मानित किया और कहा कि सांस्कृतिक गतिविधियां छात्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने बताया कि ऐसी गतिविधियां छात्रों के आत्मविश्वास, सामाजिक कौशल और शैक्षणिक प्रदर्शन को बेहतर बनाने में सहायक होती हैं।
निदेशिका श्रीमती रीना नाहर ने संस्कार आधारित शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि अनुशासन, कठिन परिश्रम और निरंतर प्रयास से ही सफलता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि महाविद्यालय का उद्देश्य युवाओं को उच्च शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार करना है।
कार्यक्रम का संचालन और समापन
कार्यक्रम का संचालन प्रो. अंजलि चौहान और प्रो. प्रवीण बैरागी ने कुशलता से किया। समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिसमें अतिथियों, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम को सफल बनाने में नंदनी प्रजापत, कोमल सारस, कनीज खान और एविन गोयल जैसे विद्यार्थियों का विशेष योगदान रहा।
यह वार्षिक उत्सव महाविद्यालय के विद्यार्थियों के शैक्षणिक और सांस्कृतिक विकास का प्रतीक बन गया, जिसने सभी उपस्थितजनों के हृदय में एक नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार किया।
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