उर्दू अकादमी का अनूठा कदम: तारीफ, इज़्ज़त और शुक्रिया से ही होती है कामयाबी की गारंटी: डॉ. मेहदी


  • जश्न-ए-उर्दू के नायकों का किया सम्मान

✍️सप्तग्रह रिपोर्टर 

भोपाल। कार्यक्रमों की भागदौड़ और व्यस्तता के बीच अक्सर उन लोगों को भुला दिया जाता है, जिनकी मेहनत और योगदान से किसी आयोजन की सफलता सुनिश्चित होती है। इसी परंपरा को तोड़ते हुए मप्र उर्दू अकादमी ने एक सराहनीय पहल की। हाल ही में आयोजित तीन दिवसीय जश्न-ए-उर्दू के सफल समापन के बाद अकादमी ने उन सभी मददगारों को सम्मानित किया, जिनकी कोशिशों से यह कार्यक्रम संभव हो पाया।

जनजाति संग्रहालय में आयोजित हुआ मिलन समारोह


मंगलवार को राज्य जनजाति संग्रहालय की खूबसूरत वादियों में एक विशेष मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इसमें साहित्यकार, शायर, फनकार, पत्रकार और कार्यक्रम से जुड़े सभी योगदानकर्ताओं को आमंत्रित किया गया। अकादमी की निदेशक डॉ. नुसरत मेहदी ने वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रजिया हामिद की उपस्थिति में सभी को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया और उनके सहयोग का धन्यवाद किया।

डॉ. नुसरत मेहदी ने कहा, "किसी भी आयोजन की सफलता एक सामूहिक प्रयास का परिणाम होती है। इसके लिए हर व्यक्ति का योगदान महत्वपूर्ण होता है। प्रशंसा और शुक्रिया के दो शब्द आगे बेहतर काम करने की प्रेरणा देते हैं। यह परंपरा जारी रहनी चाहिए।"

कार्यक्रम में विशेष अतिथि और योगदानकर्ता


समारोह में शामिल प्रमुख हस्तियों में वरिष्ठ साहित्यकार इकबाल मसूद, सीनियर फोटोग्राफर ताहा पाशा, उद्घोषक और शायर बद्र वास्ती शामिल थे। इसके अलावा रंगमंच कलाकार अदनान खान और उनकी टीम ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

कार्यक्रम की सफलता में योगदान देने वाले रजा दुर्रानी, तसनीम राजा, सोहेब खान, खालिद खान, आरिफ अली आरिफ और डॉ. कमर अली शाह को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

मीडिया कर्मियों का भी सम्मान


मीडिया में योगदान देने वाले पत्रकार और फोटोग्राफर भी इस सम्मान समारोह का हिस्सा बने। नौशाद कुरैशी, खान आशु, रिजवान शानू, सलमान खान, सलमान गनी समेत शहर के कई प्रतिष्ठित पत्रकारों और फोटोग्राफरों को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

शुक्रिया का रिवाज जरूरी

डॉ. नुसरत मेहदी ने कहा कि जश्न-ए-उर्दू का यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक परंपरा है। उन्होंने इसे सामूहिक योगदान की कद्र और उसका उत्सव बताया। उन्होंने कहा, "हर छोटे-बड़े योगदान को सराहना मिलनी चाहिए, क्योंकि यही सफलता की गारंटी है।"

कार्यक्रम का समापन

यह भव्य समारोह हाई-टी के साथ समाप्त हुआ। सभी उपस्थित योगदानकर्ताओं ने इसे मप्र उर्दू अकादमी की एक अनूठी पहल बताते हुए सराहा। अकादमी का यह प्रयास न केवल सामूहिकता को पहचान देने वाला है, बल्कि इसे एक नई परंपरा के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

जश्न-ए-उर्दू का यह आयोजन न केवल उर्दू भाषा और संस्कृति के प्रति सम्मान व्यक्त करता है, बल्कि योगदान देने वालों के प्रति आभार प्रकट करने की मिसाल भी पेश करता है।


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