वृद्ध एवं असाध्य रोगों से ग्रसित बंदियों को स्वास्थ्य उपचार का अधिकार: जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान
- विशेष जागरूकता शिविर में बंदियों के स्वास्थ्य अधिकारों पर चर्चा
जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान ने मानवाधिकारों और जेल प्रशासन की जिम्मेदारियों पर दिया जोर
✍️सप्तग्रह रिपोर्टर
भोपाल। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, इंदौर के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव के निर्देशन में तथा तहसील विधिक सेवा समिति, देपालपुर के अध्यक्ष एवं जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान के मार्गदर्शन में उपजेल देपालपुर में एक विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर वृद्ध एवं असाध्य रोगों से पीड़ित बंदियों के स्वास्थ्य व उपचार संबंधी अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु आयोजित किया गया।
राष्ट्रीय योजनाओं का उद्देश्य
जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान ने शिविर के दौरान बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा), नई दिल्ली द्वारा संचालित योजनाओं के अंतर्गत गंभीर रोगों और वृद्धावस्था से जूझ रहे बंदियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा, "हिरासत में रखे गए व्यक्ति के साथ भी मानवीय गरिमा और संवेदनशीलता के साथ व्यवहार करना आवश्यक है।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को अवैध रूप से जेल में नहीं रखा जा सकता और उन्हें उचित चिकित्सा और अन्य सुविधाओं का अधिकार प्राप्त है।
जेल प्रशासन की समीक्षा
इस अवसर पर न्यायाधीश खान ने उपजेल देपालपुर में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, भोजन, बिस्तर और अन्य आवश्यक वस्तुओं की स्थिति का जायजा लिया। सहायक जेल अधीक्षक आर. एस. कुशवाह ने न्यायाधीश को जेल में दी जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी दी।
मानवाधिकारों की रक्षा पर बल
जिला न्यायाधीश ने कहा कि बंदियों को स्वास्थ्य सेवाओं, उचित आहार और स्वच्छ वातावरण का अधिकार है। उन्होंने जेल प्रशासन को इन सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करने की सलाह दी।
उपस्थित अधिकारी और विशेषज्ञ
इस शिविर में न्यायिक मजिस्ट्रेट सैय्यद दानिश अली, न्यायिक मजिस्ट्रेट रिजवाना कौसर, न्यायिक मजिस्ट्रेट दिव्या श्रीवास्तव, सहायक जेल अधीक्षक आर. एस. कुशवाह, प्रमुख मुख्य प्रहरी रामेश्वर झाड़िया, फिजियोथेरेपिस्ट शिवानी श्रीवास्तव, प्रहरी विवेक शर्मा, प्रहरी आरती सोलिया, प्रहरी एकता पटेल और नायब नाजिर दिलीप यादव सहित अन्य जेल स्टाफ उपस्थित रहे।
शिविर का महत्व
यह जागरूकता शिविर न केवल बंदियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का मंच बना, बल्कि जेल प्रशासन को उनकी जिम्मेदारियों का भी स्मरण कराया। शिविर ने मानवाधिकारों की रक्षा और न्याय प्रणाली में सहानुभूति को प्राथमिकता देने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
इस प्रकार के आयोजनों से यह सुनिश्चित होता है कि जेल में रह रहे बंदी न केवल अपने अधिकारों से परिचित हों, बल्कि जेल प्रशासन भी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ उनके कल्याण के लिए प्रयासरत रहे।
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