जागरूकता की नई पहल: दहेज प्रथा के खात्मे की ओर शैला अहमद का बड़ा कदम
5 फरवरी से शुरू होगी दहेज मुक्त भारत के लिए पूर्व सांसद की राष्ट्रीय मुहिम
मुद्दे की बात ✍️नौशाद कुरैशी
दिल्ली की पूर्व राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेत्री शैला अहमद ने दहेज प्रथा को समाप्त करने के लिए देशव्यापी अभियान शुरू करने की घोषणा की है। यह अभियान 5 फरवरी से पूरे भारत में शुरू होगा। इस मुहिम का उद्देश्य लोगों को दहेज प्रथा जैसी सामाजिक बुराई के प्रति जागरूक करना और इसे जड़ से खत्म करना है। शैला अहमद ने समाज से अपील की है कि दहेज लेने वाले व्यक्तियों का सामाजिक बहिष्कार करें और उनके विवाह समारोहों में भाग न लें।
जिलास्तर पर संगठन बनाने की योजना
इस अभियान के तहत, शैला अहमद प्रत्येक जिले में एक संगठन स्थापित करेंगी, जो दहेज प्रथा के खिलाफ काम करेगा। यह संगठन दहेज की समस्याओं को उजागर करेगा और लोगों को इस कुप्रथा के खिलाफ संगठित करेगा। शैला अहमद ने कहा कि दहेज प्रथा के कारण गरीब परिवारों को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि दहेज देने के लिए कई परिवार ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज लेने को मजबूर हो जाते हैं, अपनी जमीन बेच देते हैं, या किश्तों में दहेज देने का वादा करते हैं।
दहेज से संबंधित हिंसा पर चिंता
शैला अहमद ने कहा कि दहेज प्रथा केवल आर्थिक समस्या नहीं है, बल्कि यह महिलाओं और लड़कियों के जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है। यह प्रथा शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक हिंसा को जन्म देती है। शादी से पहले, शादी के दौरान और शादी के बाद दुल्हन के परिवार पर दहेज के रूप में उपहार, पैसे, सामान या संपत्ति देने का दबाव बनाया जाता है। उन्होंने इस तरह के किसी भी प्रकार के लेन-देन का कड़ा विरोध करने की अपील की है।
नैतिक और कानूनी दृष्टिकोण से दहेज प्रथा का विरोध
शैला अहमद ने कहा कि दहेज प्रथा नैतिक रूप से मानव अधिकारों और सम्मान का उल्लंघन है। यह महिलाओं को वस्तुओं के रूप में देखने की मानसिकता को बढ़ावा देती है और उनके आत्मसम्मान और स्वायत्तता को कम करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह प्रथा समानता, न्याय और मानव गरिमा के सिद्धांतों के खिलाफ है।
उन्होंने यह भी बताया कि दहेज प्रथा का विरोध अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दस्तावेजों में निहित मौलिक सिद्धांतों के अनुरूप है। इनमें "महिलाओं के विरुद्ध सभी प्रकार के भेदभाव के उन्मूलन पर कन्वेंशन (CEDAW)" शामिल है, जो महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
समाज से अपील
शैला अहमद ने समाज के हर वर्ग से इस आंदोलन का हिस्सा बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि दहेज प्रथा केवल एक कुप्रथा नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की समानता और नैतिकता पर भी सवाल उठाती है। इसे खत्म करने के लिए समाज के हर व्यक्ति को आगे आना होगा और अपनी भूमिका निभानी होगी।
इस अभियान का उद्देश्य एक दहेज मुक्त समाज का निर्माण करना और महिलाओं को उनके अधिकार और सम्मान दिलाना है। शैला अहमद का मानना है कि अगर समाज एकजुट होकर इस कुप्रथा के खिलाफ खड़ा होगा, तो दहेज प्रथा को जड़ से खत्म किया जा सकता है।
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