पत्रकारों की हत्याओं ने उजागर की सुरक्षा में खामियां: डॉ. कैस की सरकारों से अपील
स्वतंत्र पत्रकारिता की रक्षा हेतु राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू करना जरूरी: पत्रकारों पर बढ़ते हमले चिंताजनक
✍️सैयद रिजवान अली
भोपाल। भारत में पत्रकारों पर हो रहे हमले, हत्याएं और झूठे मुकदमों की बढ़ती घटनाएं गहरी चिंता का विषय बन गई हैं। हाल ही में छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में गंगालूर से हिरोली तक 120 करोड़ रुपये की सड़क निर्माण परियोजना में कथित भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले युवा पत्रकार मुकेश चंद्राकर की नृशंस हत्या ने प्रदेश सरकारों की विफलता को उजागर कर दिया है। यह कहना है प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. सैय्यद खालिद कैस का।
डॉ. कैस ने अपने बयान में कहा कि देशभर में पत्रकारों की सुरक्षा की स्थिति बेहद चिंताजनक है। पत्रकारों पर हमले और हत्याएं अब सामान्य हो गई हैं। रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पत्रकार सुरक्षा के मामले में भारत 180 देशों की सूची में 162वें स्थान पर है। यूनेस्को की रिपोर्ट बताती है कि पिछले पांच वर्षों में भारत में 17 पत्रकारों की हत्या हुई है, जबकि 1993 से अब तक देश में 60 पत्रकारों की जान गई है।
उन्होंने कहा कि पत्रकारों पर हिंसा के अधिकांश मामले छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से सामने आते हैं, जहां भ्रष्टाचार, अपराध और सत्ता संरक्षित तत्व पत्रकारों की आवाज दबाने के प्रयास में जुटे रहते हैं। इन घटनाओं से यह स्पष्ट है कि पत्रकारों के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से काम करना जोखिम भरा हो गया है।
डॉ. कैस ने इस बात पर बल दिया कि अब समय आ गया है कि केंद्र और राज्य सरकारें पत्रकारों की सुरक्षा के प्रति गंभीर हों। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की रक्षा के लिए राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करना अनिवार्य हो गया है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि निष्पक्ष और स्वतंत्र पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों को न केवल सुरक्षा और संरक्षण मिले, बल्कि वे बिना किसी डर और दबाव के अपने कार्य को अंजाम दे सकें।
अध्यक्ष ने कहा कि यदि पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो निष्पक्ष पत्रकारिता पर खतरा और बढ़ेगा। उन्होंने सरकारों से अपील की कि वे जल्द से जल्द पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करें और पत्रकारों को सुरक्षित माहौल प्रदान करें। यह कदम लोकतंत्र को मजबूत करने और स्वतंत्र पत्रकारिता को बनाए रखने के लिए अत्यावश्यक है।
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