विक्रांत भूरिया बने आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष, पार्टी ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारी


  • कांग्रेस की आदिवासी वोट बैंक मजबूत करने की रणनीति 

सियासी खबर: ✍️ नौशाद कुरैशी 

ध्यप्रदेश के झाबुआ से कांग्रेस विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया को ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इससे पहले वे मप्र युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। विक्रांत भूरिया कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कांतिलाल भूरिया के पुत्र हैं। उनकी इस नियुक्ति को कांग्रेस द्वारा मध्यप्रदेश के 22% आदिवासी वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

विक्रांत भूरिया अब शिवाजीराव मोघे की जगह आदिवासी कांग्रेस की कमान संभालेंगे। कांग्रेस ने उन्हें यह जिम्मेदारी ऐसे समय दी है, जब पार्टी मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों में आदिवासी मतदाताओं को लुभाने की कोशिशों में जुटी है। बता दें कि मध्यप्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में से 47 सीटें आदिवासी समुदाय के लिए आरक्षित हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इन 47 में से 22 सीटें जीती थीं, जिससे पार्टी को मजबूती मिली थी। कांग्रेस लंबे समय से आदिवासी समुदाय को अपने कोर वोट बैंक के रूप में देखती रही है और अब विक्रांत भूरिया की नियुक्ति से पार्टी को इस वर्ग में अपनी स्थिति और मजबूत करने की उम्मीद है।

विक्रांत भूरिया ने पिछले साल मप्र युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। वे युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के दावेदार भी थे, लेकिन उन्हें वह जिम्मेदारी नहीं मिली। अब पार्टी ने उन्हें आदिवासी कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर एक अहम दायित्व सौंपा है। इस नियुक्ति के बाद विक्रांत भूरिया का कद प्रदेश के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ जाएगा।

नई जिम्मेदारी मिलने पर डॉ. विक्रांत भूरिया ने कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह पद सिर्फ एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक मिशन है। उनका उद्देश्य आदिवासी समाज के हक, सम्मान और अधिकारों की रक्षा एवं सशक्तिकरण के लिए काम करना होगा। उन्होंने कहा, "यह हमारे स्वाभिमान और न्याय की लड़ाई को और मजबूती देने का अवसर है। मैं संकल्प लेता हूँ कि इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और संघर्ष के साथ निभाऊँगा, ताकि आदिवासी समाज की आवाज़ को और अधिक प्रभावी व सशक्त बनाया जा सके।"

कांग्रेस की इस रणनीति के पीछे एक स्पष्ट संदेश है—युवा आदिवासी नेताओं को आगे लाकर आदिवासी समुदाय में पार्टी की पकड़ मजबूत करना। आदिवासी समुदाय अभी भी कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है, लेकिन बीते कुछ वर्षों में भाजपा ने भी इस वर्ग में अपनी पैठ बनाने की कोशिश की है। ऐसे में कांग्रेस ने विक्रांत भूरिया को यह जिम्मेदारी देकर आदिवासी राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत करने की पहल की है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विक्रांत भूरिया इस जिम्मेदारी को किस तरह निभाते हैं और कांग्रेस की आदिवासी राजनीति को नई दिशा देने में कितने सफल होते हैं। उनकी नियुक्ति के बाद मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों में आदिवासी राजनीति पर इसका क्या असर पड़ता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।



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