इस्लामिक आइडियल फाउंडेशन का सालाना इजलास


  • जामिया इस्लामिया रेहानतुल हुदा का उद्घाटन, 500 से ज्यादा छात्रों को इनामात की तकसीम
  • उलमा, समाजी और सियासी हस्तियों की शानदार शिरकत

✍️नौशाद कुरैशी 

भोपाल। तालीम और तरबियत के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले इस्लामिक आइडियल फाउंडेशन के तत्वावधान में सालाना इजलास का शानदार आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण जामिया इस्लामिया रेहानतुल हुदा का उद्घाटन रहा, जो दीन और दुनियावी तालीम के बेहतरीन मेलजोल का केंद्र बनेगा। इस मौके पर 500 से अधिक छात्रों को इनामात और प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम में देशभर के प्रसिद्ध उलमा-ए-किराम, शिक्षाविद, समाजसेवी, सियासी रहनुमा और सहाफ़ी (पत्रकार) शामिल हुए।

इजलास के दौरान तालीम और तरबियत के महत्व पर जोर दिया गया, जहां नन्हे बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियां दीं। ढाई साल के नन्हे बच्चों से लेकर 70 साल की बुज़ुर्ग महिलाओं तक ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जिससे माहौल अत्यंत प्रभावशाली और प्रेरणादायक हो गया। खासकर नन्हे अहमद बिन फ़राज़ और मोहम्मद बिन दानिश की तिलावत-ए-क़ुरआन ने उपस्थित लोगों के दिल जीत लिए और एक रूहानी माहौल बना दिया।


जामिया इस्लामिया रेहानतुल हुदा: एक नए तालीमी मरकज़ की शुरुआत

इजलास का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा जामिया इस्लामिया रेहानतुल हुदा का उद्घाटन था, जिसे आधुनिक शिक्षा और इस्लामी तालीम का बेहतरीन संयोजन बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया गया।

इस जामिया के उद्देश्यों में शामिल हैं:

✅ इस्लामी और आधुनिक शिक्षा का समन्वय

✅ नई पीढ़ी को नैतिक और बौद्धिक रूप से सशक्त बनाना

✅ समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने वाले युवाओं को तैयार करना

✅ शिक्षा के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व को बढ़ावा देना

इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि यह जामिया समाज में एक नई तालीमी क्रांति लाने का कार्य करेगा, जहां इस्लामी तालीम और आधुनिक शिक्षा का बेहतरीन मिश्रण मिलेगा।

इजलास में उलमा-ए-किराम और समाजी रहनुमाओं की शिरकत

इजलास में भारत के प्रसिद्ध उलमा-ए-किराम और सियासी व समाजी हस्तियों ने भाग लिया। उन्होंने इस्लामी तालीम के महत्व और शिक्षा के माध्यम से समाज में सुधार लाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

प्रमुख उलमा-ए-किराम:

 हज़रत मौलाना अहमद सईद साहब नदवी, हज़रत मौलाना तसव्वुर हुसैन साहब फलाही, मुफ्ती रईस अहमद खान क़ासमी (नायब मुफ्ती-ए-शहर भोपाल), मुफ्ती अली क़ादिर हुसैनी नदवी (नायब क़ाज़ी-ए-शहर भोपाल), डॉ. शम्सुद्दीन नदवी, डॉ. इरफ़ान आलम क़ासमी, कारी शरीफ मज़ाहिरी, मौलाना नौशाद नदवी।

इन सभी विद्वानों ने इस्लामी शिक्षा की आवश्यकता और इसके समाज में सकारात्मक प्रभावों पर जोर दिया।

सियासी और समाजी रहनुमा की भागीदारी

इस इजलास में कई महत्वपूर्ण सियासी और समाजी हस्तियां भी मौजूद थीं, जिन्होंने शिक्षा के प्रसार और नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना पर जोर दिया।

प्रमुख सियासी हस्तियां:

MLA आतिफ़ अकील"तालीम ही वह बुनियाद है जो एक बेहतर समाज की तामीर करती है। दीन और दुनियावी शिक्षा का संयोजन हमें न केवल दुनिया में बल्कि आखिरत में भी कामयाब बना सकता है।"

मुनव्वर कौसर (कांग्रेस प्रदेश महासचिव) – "तालीम केवल डिग्री लेने का नाम नहीं, बल्कि यह एक किरदार-साज़ी का अमल है, जो कौमों की तक़दीर बदल सकता है।"

आसिफ ज़की (कांग्रेस ज़िला कार्यवाहक अध्यक्ष) – "इस्लामिक आइडियल फाउंडेशन की तालीमी सेवाएं काबिले तारीफ हैं। यह संस्थान आने वाली नस्लों के लिए एक बेहतरीन मंच तैयार कर रहा है।"


इजलास में सहाफ़ी (पत्रकार) और शिक्षाविदों की भागीदारी

प्रमुख पत्रकार: सय्यद परवेज़ खलील, वाहिद खान, नौशाद कुरैशी, अनम इब्राहिम, सलमान मियां नदीम।

प्रमुख शिक्षाविद: प्रोफेसर परवीन खानम और  शीबा फरहा। 

इजलास के सफल आयोजन में मुनज्ज़मीन (आयोजकों) की भूमिका

इस्लामिक आइडियल फाउंडेशन के इस सफल आयोजन के पीछे कई समर्पित व्यक्तियों और संगठनों का योगदान रहा।

प्रमुख आयोजनकर्ता:सय्यदा महविश परवेज़ (इस्लामिक और रिसर्च स्कॉलर), मुफ्ती सय्यद दानिश परवेज़ नदवी, कारी शाहवेज़ परवेज़ नदवी, इंजीनियर फ़राज़ खान (चेयरमैन, मल्टी हैंड्स टू हेल्प)। इसके अलावा, आयोजन को सफल बनाने में सलमान खान और उनकी टीम, तथा इलमा कुरैशी, हुमैरा खान, अनसारी बुशरा रहमान, फिजा खान, नाज़मा खान, ज़रीन बेगम, ज़रीन खान आदि स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इजलास की सदारत और समापन भाषण

इस ऐतिहासिक इजलास की सदारत हज़रत अहमद सईद नदवी साहब ने की। उन्होंने समापन भाषण में इस्लामिक आइडियल फाउंडेशन की तालीमी और समाजी सेवाओं की प्रशंसा की और कहा:

> "यह संस्था दीन और दुनिया के इम्तिज़ाज के साथ जो तालीमी और इस्लाही खिदमात अंजाम दे रही है, वह काबिले तारीफ है।"

हमारी नजर: तालीम की रोशनी फैलाने का संकल्प

इस्लामिक आइडियल फाउंडेशन का यह इजलास न केवल तालीम और तरबियत के फरोग़ का मंच बना, बल्कि इसने समाज को एक मजबूत संदेश दिया कि शिक्षा ही विकास और सुधार की असली कुंजी है।

इजलास का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि इस्लामिक आइडियल फाउंडेशन आने वाले समय में अपनी तालीमी और इस्लाही सेवाओं को और विस्तारित करेगा।

"जहां इल्म है, वहीं उजाला है – तालीम की इस रोशनी को फैलाते रहें!"



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