मछली जल की रानी है: नई तकनीक से बदलेगी मत्स्य पालन की तस्वीर


✍️सप्तग्रह रिपोर्टर 

भोपाल। बदलते दौर के साथ हर क्षेत्र में तकनीकी परिवर्तन हो रहे हैं, जिससे कार्य प्रणाली आसान और अधिक प्रभावी बन रही है। इसी दिशा में मध्यप्रदेश मत्स्य महासंघ (सहकारी) मर्यादित ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में नई तकनीकों को अपनाने की पहल की है। इसी कड़ी में "टेक्नोलॉजी ट्रांसफर यूनिट" का शुभारंभ किया गया, जिससे मत्स्य पालन को वैज्ञानिक आधार मिलेगा और उत्पादन में वृद्धि होगी।

तकनीकी विकास की नई पहल


सोमवार को भोपाल इकाई के अंतर्गत भदभदा मत्स्य बीज प्रक्षेत्र में मत्स्य महासंघ की प्रबंध संचालक निधि निवेदिता (आईएएस) ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्घाटन किया। इस अवसर पर रवि गजभिये (संचालक, मत्स्योद्योग), यतीश त्रिपाठी (सचिव, मत्स्य महासंघ), गिरीश मेश्राम (उप संचालक) और ज्योति टोप्पो (उप संचालक, मत्स्योद्योग विभाग) उपस्थित रहे।

इस कार्यक्रम में जलाशयों के वैज्ञानिक प्रबंधन एवं उत्पादन तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। डिस्प्ले एरिया में निम्नलिखित विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई—

  • जलाशयों का वर्किंग मॉडल
  • मॉडल फिशरी एस्टेट
  • विभिन्न प्रकार के मत्स्याखेट उपकरण (नाव, जाल आदि)
  • रि-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS), बायोफ्लॉक, पॉली लाइनर पॉन्ड जैसी नई मत्स्य पालन तकनीकें
ड्रोन तकनीक से जलाशय प्रबंधन

इस अवसर पर जलाशयों के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए ड्रोन तकनीक का प्रदर्शन भी किया गया। ड्रोन के माध्यम से जलाशयों की निगरानी, जल गुणवत्ता का विश्लेषण और मत्स्य पालन की गतिविधियों को सुव्यवस्थित करने की योजना पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने इस तकनीक को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया और मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने हेतु हर संभव प्रयास करने के निर्देश भी दिए।

मछुआरों की समस्याओं पर चर्चा


कार्यक्रम के दौरान केरवां जलाशय में कार्यरत पंजीकृत समिति के मछुआ सदस्यों ने मत्स्य पालन के दौरान आने वाली समस्याओं को साझा किया। मुख्य रूप से मछुआरों की आवास समस्या, उनकी आय बढ़ाने के लिए फिश कियोस्क/पार्लर और मोबाइल मार्केटिंग जैसी सुविधाओं की मांग रखी गई। अधिकारियों ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया और शासन स्तर पर आवश्यक कार्यवाही करने का आश्वासन दिया।

सरकारी योजनाओं के अंतर्गत पंजीयन

भारत सरकार की एनएफडीपी (राष्ट्रीय मत्स्य विकास योजना) के तहत मछुआरों का पंजीयन किया गया और प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए गए। इसके साथ ही, महासंघ द्वारा इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवेलपमेंट कार्यक्रम प्रस्तावित किया गया, जो भविष्य में मत्स्य पालन को सहकारिता क्षेत्र में अग्रणी बनाएगा।

उन्नत मत्स्य पालन की ओर एक कदम

इस कार्यक्रम के माध्यम से मत्स्य पालन को नई तकनीकों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किया गया है। इससे न केवल मछुआरों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि मत्स्य उत्पादन में भी गुणात्मक सुधार आएगा। राज्य सरकार एवं मत्स्य महासंघ के इस प्रयास को मील का पत्थर माना जा रहा है, जो आने वाले समय में मत्स्य उद्योग को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।



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