गोलघर में गूँजी सूफियाना सदा: संगीत, इतिहास और संस्कृति का अनूठा संगम


  • ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 के तहत: मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी की सांस्कृतिक पहल

✍️नौशाद कुरैशी 
भोपाल की ऐतिहासिक धरोहर गोलघर, शाहजहाँनाबाद एक बार फिर सांस्कृतिक रंगों से सराबोर हो गई, जब मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी, म.प्र. संस्कृति परिषद, संस्कृति विभाग के तत्वावधान में महफ़िल-ए-क़व्वाली का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 के अंतर्गत संचालनालय पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय के सहयोग से 25 फ़रवरी को शाम 7:30 बजे आयोजित हुआ।

भोपाल की सांस्कृतिक विरासत को संजोने की पहल


मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी की निदेशक डॉ. नुसरत मेहदी ने इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य भोपाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को उजागर करना तथा ऐतिहासिक स्थलों को सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़कर उन्हें जीवंत बनाना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से अकादमी ने निवेशकों और आगंतुकों को यह संदेश देने का प्रयास किया कि भोपाल न केवल व्यापार और निवेश के लिए एक अनुकूल स्थान है, बल्कि इसकी सांस्कृतिक गहराई और ऐतिहासिक महत्व भी अद्वितीय है।

संगीत और सूफियाना रंग में डूबी शाम


महफ़िल-ए-क़व्वाली में प्रसिद्ध क़व्वाल नासिर हुसैन साबरी और उनकी टीम ने अपनी मधुर आवाज़ और भावपूर्ण प्रस्तुति से समां बाँध दिया। श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने वाले सूफ़ियाना कलामों में शामिल थे:

  • काबे में तेरा जलवा, काशी में नजारा है – सांप्रदायिक सौहार्द्र और एकता का संदेश
  • अब तो हर वक़्त यही काम किया करते हैं – इबादत और आत्मसमर्पण का भाव
  • लहराये आसमान में भारत का तिरंगा – देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुति 
  • छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाइके – अमीर खुसरो की कालजयी रचना
  • दमादम मस्त कलंदर – बाबा बुल्ले शाह का सूफी भक्ति और ऊर्जा से भरपूर कलाम 

प्रस्तुतियों के दौरान श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट और वाह-वाह के साथ क़व्वालियों का भरपूर आनंद लिया। कार्यक्रम का आकर्षण न केवल बेहतरीन संगीत रहा, बल्कि गोलघर की ऐतिहासिक भव्यता और इसकी गूंजती हुई ध्वनियाँ भी पूरे माहौल को मंत्रमुग्ध कर रही थीं।

सांस्कृतिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

इस आयोजन के माध्यम से मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी ने यह संदेश दिया कि भोपाल न केवल एक व्यावसायिक हब है, बल्कि इसकी सांस्कृतिक धरोहर भी वैश्विक पर्यटन और निवेशकों के आकर्षण का केंद्र हो सकती है। इस प्रयास से भोपाल की सांस्कृतिक पहचान और अधिक सशक्त होगी तथा शहर को सांस्कृतिक पर्यटन के नक्शे पर एक महत्वपूर्ण स्थान मिलेगा।

सम्मान एवं आभार

कार्यक्रम के अंत में डॉ. नुसरत मेहदी ने संचालनालय पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय का विशेष आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में संचालनालय पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय के प्रभारी अधिकारी रितेश शर्मा तथा वरिष्ठ पुरातत्त्वविद् डॉ. अहमद अली की गरिमामयी उपस्थिति रही।

महफ़िल-ए-क़व्वाली ने भोपालवासियों को संगीत, इतिहास और संस्कृति का अद्भुत संगम प्रदान किया। इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि संस्कृति और संगीत की शक्ति से ऐतिहासिक धरोहरों को पुनर्जीवित किया जा सकता है और इन्हें वैश्विक पहचान दिलाई जा सकती है।



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