जिला न्यायाधीश हिदायत उल्लाह खान ने कहा- "रचनात्मकता, शिक्षा, संवेदना और सुधार से बदलेगी बंदियों की जिंदगी"


  • उपजेल देपालपुर में विधिक साक्षरता शिविर का सफल आयोजन 

✍️सप्तग्रह रिपोर्टर 

इंदौर/देपालपुर जिला न्यायाधीश हिदायत उल्लाह खान ने कहा कि बंदियों को केवल सजा भुगतने के रूप में न देखा जाए, बल्कि उनके सुधार और पुनर्वास की दिशा में प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। इसके लिए उन्हें शिक्षा, कौशल विकास और रचनात्मक कार्यों से जोड़ना जरूरी है, जिससे वे जेल से बाहर जाकर समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर सकें।

इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, इंदौर के अध्यक्ष एवं प्रधान जिला न्यायाधीश अजय श्रीवास्तव के निर्देशन में तथा तहसील विधिक सेवा समिति, देपालपुर के अध्यक्ष जिला न्यायाधीश हिदायत उल्लाह खान के मार्गदर्शन में 22 फरवरी को उपजेल देपालपुर में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर के माध्यम से बंदियों को उनके अधिकारों, कर्तव्यों और विधिक प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई, साथ ही उनके पुनर्वास को लेकर विभिन्न योजनाओं पर चर्चा की गई।


रचनात्मक कार्यों से होगा बंदियों का पुनर्वास

शिविर को संबोधित करते हुए जिला न्यायाधीश हिदायत उल्लाह खान ने कहा कि बंदियों को जेल में भी रचनात्मक और शिक्षाप्रद कार्यों में संलग्न किया जाना चाहिए, जिससे उनकी मानसिकता सकारात्मक बने और वे भविष्य में एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में समाज में पुनः स्थापित हो सकें। उन्होंने कहा कि शिक्षा और कौशल विकास ऐसे उपकरण हैं, जो किसी भी व्यक्ति के जीवन को नई दिशा दे सकते हैं, और यह बात जेल में निरुद्ध व्यक्तियों पर भी लागू होती है।

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि बंदियों के लिए ऐसे कार्यक्रम विकसित किए जाने चाहिए, जिनसे वे आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने कहा कि बंदियों को ऐसी परिस्थितियों में रखा जाना चाहिए, जो क्रूर और अमानवीय न हों, बल्कि उन्हें समुचित पोषण, चिकित्सा सुविधा, व्यायाम, मनोरंजन और निजता के अधिकार भी मिलने चाहिए।


बंदियों की सुविधाओं और अधिकारों की समीक्षा

शिविर के दौरान जिला न्यायाधीश हिदायत उल्लाह खान ने बंदियों से सीधा संवाद किया और उनकी समस्याओं को जाना। उन्होंने बंदियों के वांछित चिकित्सा उपचार, भोजन की गुणवत्ता, परिजनों से मुलाकात और जेल प्रशासन द्वारा आयोजित कौशल विकास कार्यक्रमों की भी समीक्षा की।

उन्होंने जेल प्रशासन को निर्देशित किया कि बंदियों को सुधारात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए अधिक से अधिक कार्यक्रम संचालित किए जाएं। इससे वे जेल में रहते हुए समाजोपयोगी कौशल प्राप्त कर सकेंगे और सजा पूरी होने के बाद आत्मनिर्भर बन सकेंगे।

शिविर में वरिष्ठ अधिकारियों की सहभागिता

इस जागरूकता शिविर में न्यायिक मजिस्ट्रेट दानिश अली, न्यायिक मजिस्ट्रेट रिजवाना कौसर और न्यायिक मजिस्ट्रेट दिव्या श्रीवास्तव सहित सहायक जेल अधीक्षक आर. एस. कुशवाह, प्रमुख प्रहरी रामेश्वर झाड़िया, फिजियोथैरेपिस्ट शिवानी श्रीवास्तव, प्रहरी विवेक शर्मा, प्रहरी आरती सोलिया, प्रहरी एकता पटेल, टेक्नीशियन इंदर सिंह राय और नायब नाजिर दिलीप यादव सहित संपूर्ण जेल स्टाफ उपस्थित रहा।


बंदियों के पुनर्वास की दिशा में सकारात्मक पहल

इस विधिक साक्षरता शिविर के माध्यम से बंदियों को उनके अधिकारों, कर्तव्यों और पुनर्वास की दिशा में जागरूक किया गया। जेल प्रशासन द्वारा इस तरह की पहल बंदियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को सुधारने में सहायक होगी।

जिला न्यायाधीश हिदायत उल्लाह खान ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों को लगातार आयोजित किया जाना चाहिए, ताकि बंदियों को अपराध के रास्ते से हटाकर समाजोपयोगी नागरिक बनाया जा सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बंदियों का पुनर्वास न केवल उनके जीवन में परिवर्तन लाएगा, बल्कि समाज में अपराध दर को भी कम करने में सहायक होगा।

इस आयोजन से यह स्पष्ट होता है कि बंदियों को सही मार्गदर्शन, शिक्षा और कौशल प्रदान करके उन्हें एक नई राह दिखाई जा सकती है, जिससे वे अपने जीवन को फिर से संवार सकें।



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