लगातार विवादों में डॉ. द्विवेदी, महिला अधिकारियों से दुर्व्यवहार के आरोपों से वन विभाग में हड़कंप
- बरखेड़ा पठानी स्थित लघु वनोपज प्रसंस्करण केंद्र का मामला, उच्चाधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल
भोपाल। लघु वनोपज संघ के अंतर्गत संचालित बरखेड़ा पठानी स्थित लघु वनोपज प्रसंस्करण केंद्र में संविदा पर कार्यरत माइक्रोबायोलॉजी साइंटिस्ट एवं क्वालिटी मैनेजर डॉ. दीपक द्विवेदी पर अनुशासनहीनता के गंभीर आरोप लगे हैं। बीते सप्ताह महिला वैज्ञानिक को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के मामले में घिरे डॉ. द्विवेदी पर अब मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जो स्वयं एक महिला हैं, के साथ अशोभनीय व्यवहार करने का नया आरोप सामने आया है।
समीक्षा बैठक में हुआ टकराव
8 मार्च को एमएफपी पार्क के कक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान प्रयोगशाला रिपोर्ट पर केमिकल साइंटिस्ट के साथ क्वालिटी मैनेजर के हस्ताक्षर न होने की बात पर जब सीईओ द्वारा स्पष्टीकरण मांगा गया, तो डॉ. द्विवेदी ने आपा खोते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी से तीखी एवं अशोभनीय भाषा में बात की और रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट डॉ. सुमन मिश्रा, केमिकल वैज्ञानिक विजेयता श्रीवास्तव, चक्की प्रभारी बालेंद्र सिंह और स्थापना प्रभारी कैलाश रघुवंशी भी मौजूद थे।
दो महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार, एक सप्ताह में दो घटनाएँ
महज एक सप्ताह के भीतर दो अलग-अलग महिला अधिकारियों के साथ अपमानजनक व्यवहार की घटनाओं ने विभाग में सनसनी फैला दी है। इससे पहले डॉ. द्विवेदी पर केमिकल वैज्ञानिक विजेयता श्रीवास्तव को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और उनके कार्य में बाधा पहुंचाने के गंभीर आरोप लगे थे।
डॉ. द्विवेदी का पलटवार, उच्चाधिकारियों को पत्र
इस बीच, डॉ. द्विवेदी ने स्वयं को मानसिक दबाव में बताते हुए फेडरेशन के प्रबंध संचालक को पत्र लिखकर मुख्यालय अटैच करने की मांग की है। सूत्रों की मानें तो उन्हें अपनी संविदा नौकरी खतरे में नजर आ रही है, जिसके चलते उन्होंने अपने संपर्कों के माध्यम से स्थिति संभालने की कोशिश शुरू कर दी है।
कर्मचारियों में बढ़ रहा असंतोष
लगातार हो रही घटनाओं और उच्चाधिकारियों की खामोशी ने एमएफपी पार्क के कर्मचारियों में असंतोष की भावना को जन्म दे दिया है। कर्मचारी वर्ग का मानना है कि इस प्रकार की अनुशासनहीनता और महिला अधिकारियों के प्रति अपमानजनक रवैया कार्य संस्कृति और संगठनात्मक अनुशासन पर प्रतिकूल असर डाल रहा है।
अब आगे क्या?
डॉ. द्विवेदी पर लगे आरोपों की गंभीरता और साक्षियों की मौजूदगी को देखते हुए यह देखना दिलचस्प होगा कि फेडरेशन के प्रबंधन और वन विभाग इस मामले पर क्या रुख अपनाते हैं। क्या डॉ. द्विवेदी की संविदा नौकरी बचेगी, या अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा — इसका फैसला आने वाले दिनों में होगा।
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