मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी द्वारा धार, छतरपुर और अशोकनगर में "सिलसिला" के तहत साहित्यिक आयोजन संपन्न

  • साहित्य, श्रद्धांजलि और शायरी का संगम

छतरपुर /धार /अशोक नगर|✍️सप्तग्रह रिपोर्टर

ध्यप्रदेश उर्दू अकादमी, संस्कृति परिषद, संस्कृति विभाग के तत्वावधान में ज़िला अदब गोशा द्वारा धार, छतरपुर और अशोकनगर में "सिलसिला" और "तलाशे जौहर" के तहत विभिन्न साहित्यिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रदेश के प्रतिष्ठित उर्दू शायरों की स्मृति को समर्पित रहा, जिसमें साहित्यिक व्याख्यान, शायरों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ-साथ रचना पाठ भी शामिल था।

छतरपुर में कमालुद्दीन निज़ामी क़मर को समर्पित विमर्श एवं रचना पाठ


छतरपुर के प्रसिद्ध शायर कमालुद्दीन निज़ामी क़मर की स्मृति में 25 मार्च 2025 को जिनी पैलेस, छतरपुर में कार्यक्रम आयोजित किया गया। उर्दू अकादमी की निदेशक डॉ. नुसरत मेहदी ने इस आयोजन को उर्दू साहित्य की समृद्ध परंपरा के संरक्षण और नई प्रतिभाओं को मंच देने का महत्वपूर्ण प्रयास बताया।

कार्यक्रम के प्रथम सत्र में "तलाशे जौहर" के तहत लेखन प्रतियोगिता हुई, जिसमें अब्दुल मजीद, अभिषेक अरजरिया और अभिजीत सुहाने को क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। विजेताओं को उर्दू अकादमी द्वारा पुरस्कार राशि एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।

द्वितीय सत्र में "सिलसिला" के तहत विमर्श एवं रचना पाठ हुआ, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ शायर उमर अश्क ने की। इस अवसर पर साहित्यकार अन्वार उज्ज़मां ने कमालुद्दीन निज़ामी क़मर के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। मंच पर विशिष्ट अतिथि के रूप में सिराज सागरी, जावेद अख़्तर और आदर्श दुबे उपस्थित रहे।

प्रमुख शायरों के अशआर:

  • सुकून ढूँढता फिरता रहा ज़माने में, मगर सुकून मिला तेरे आस्ताने में। - उमर अश्क
  • रहे हयात में हर सू ख़ुशी बिछी होगी, हो जिसके तुम उसे दुनिया में क्या कमी होगी। - सिराज सागरी
  • फिर क्यों न गले मिल के गिले शिकवे मिटा लें, लड़ने को अगर कोई भी तैयार नहीं है। - आदर्श दुबे

धार में नाज़ शादानी को समर्पित स्मृति प्रसंग एवं रचना पाठ


धार में 26 मार्च 2025 को नाज़ शादानी की स्मृति में मैक्रो विज़न एकेडमी, सरदारपुर में कार्यक्रम आयोजित हुआ। अध्यक्षता वरिष्ठ शायर एजाज़ शादानी ने की, जबकि तजदीद साक़ी और श्रीवल्लभ विजयवर्गीय विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

कार्यक्रम के प्रारंभ में श्रीवल्लभ विजयवर्गीय ने नाज़ शादानी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनकी प्रसिद्ध ग़ज़लों और उनके योगदान को रेखांकित किया।

प्रमुख शायरों के अशआर:

  • लाख चाहा कि नाम ही न लें, वक्त पर लगता है भूल जाने में। - श्रीवल्लभ विजयवर्गीय
  • इक ज़रा जेब से संभल जाऊं, फिर कहीं घूमने निकल जाऊं। - क़मर साक़ी
  • जैसे जैसे दौलत बढ़ती जाती है, कुछ लोगों में हल्कापन आ जाता है। - तजदीद साक़ी

अशोकनगर में नूर मोहम्मद नूर को समर्पित व्याख्यान एवं रचना पाठ


अशोकनगर में 27 मार्च 2025 को रोटरी क्लब भवन में नूर मोहम्मद नूर की स्मृति में कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता अब्दुल अलीम मंसूरी ने की, जबकि सिरोंज के वरिष्ठ शायर सुलेमान अज़हर विशिष्ट अतिथि रहे।

साहित्यकार सुधीर गुप्ता ने नूर मोहम्मद नूर के साहित्यिक योगदान पर व्याख्यान दिया और बताया कि उनकी शायरी आम इंसान के दुख-सुख को दर्शाती थी।

प्रमुख शायरों के अशआर:

दिल को शफ़्फ़ाफ़ क्यूँ नहीं करते, आईना साफ़ क्यूँ नहीं करते। - सुलेमान अज़हर

बुढ़ापे में भी मैं अपना लड़कपन ढूंढ़ लेता हूं, मैं मां की गोद में सर रखके बचपन ढूंढ़ लेता हूं। - ज़मीरुद्दीन ज़मीर

मजबूर मत करो मुझे कहने पे बार बार, इक बात बारहा कहूं तो वज़न जाता है। - अविनेश सागर

आभार व्यक्त 

इन कार्यक्रमों का संचालन क्रमशः युसुफ़ शेख़, राम परिंदा और जमुना प्रसाद बेताब द्वारा किया गया। अंत में धार, छतरपुर और अशोकनगर के ज़िला समन्वयकों शबीह हाशमी, अनिता मुकाती और आर पी कामिल ने उर्दू अकादमी, अतिथियों, शायरों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।

इन आयोजनों ने मध्यप्रदेश में उर्दू साहित्य की समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाने और नई पीढ़ी को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।



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